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मैथिली शब्द, पहली कड़ी: नैहर, सासुर, कोहबर

यह प्रविष्टि अस्थायी है और प्रबंध समिति की पुष्टि शेष है।

मैथिली शब्द 15 फ़रवरी 2026

यह कड़ी उन शब्दों के लिए है जो घर में सुनाई तो देते हैं, पर जिनका अर्थ किसी ने बताया नहीं। हर कड़ी में तीन शब्द रहेंगे।

नैहर। विवाह के बाद स्त्री के माता पिता का घर नैहर कहलाता है। यह केवल पता नहीं है, एक स्थिति है। नैहर जाना कहने का अर्थ है अपने मायके जाना, और नैहर की बात करने का ढंग भी अलग होता है।

सासुर। ससुराल, यानी विवाह के बाद का घर। मैथिली में नैहर और सासुर एक दूसरे के सामने रखे जाते हैं, और लोकगीतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं दोनों के बीच की दूरी पर है।

कोहबर। विवाह के समय जिस कमरे की दीवार पर चित्र बनाए जाते हैं, वह कोहबर है। उन चित्रों में कमल, बाँस, मछली और सूर्य बार बार आते हैं। कोहबर घर का सबसे अधिक सजाया जाने वाला कोना होता है और मिथिला की चित्रकला की शुरुआत इसी दीवार से मानी जाती है।

तीनों शब्द एक ही बात की ओर जाते हैं: मिथिला में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, दो घरों का संबंध माना जाता है, और भाषा में उसके लिए अलग अलग शब्द बने हैं।

यदि घर के बड़े मैथिली बोलते हैं, तो इन शब्दों का प्रयोग सुनते ही पूछ लें कि यह किसके लिए कहा गया। एक बार पूछने से शब्द याद रह जाता है।