छठ के चार दिन: नहाय खाय से उषा अर्घ्य तक
रीति रिवाज 2 नवंबर 2025
छठ कार्तिक मास में होता है और चार दिन चलता है। व्रत करने वाले को व्रती कहा जाता है। व्रत प्रायः घर की स्त्रियाँ करती हैं, पर पुरुष भी करते हैं।
पहला दिन नहाय खाय। व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन बनाती हैं। इस दिन प्रायः कद्दू की सब्ज़ी, चना दाल और भात बनता है, और घर के लोग वही खाते हैं।
दूसरा दिन खरना। दिन भर उपवास रहता है। सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, जिसे रसियाव कहते हैं, और रोटी बनाकर व्रती खाती हैं। इसके बाद निर्जला व्रत आरंभ होता है, यानी पानी भी नहीं।
तीसरा दिन संध्या अर्घ्य। सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना और नारियल सजाकर घाट पर ले जाया जाता है और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यही वह बात है जो छठ को अलग करती है: किसी और पर्व में डूबते सूर्य को पहले नहीं पूजा जाता।
चौथा दिन उषा अर्घ्य। अँधेरे में घाट पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती पारण करती हैं और व्रत पूरा होता है।
दिल्ली में नदी का घाट हर परिवार के पास नहीं होता, इसलिए परिषद् घाट की व्यवस्था करती है। बच्चों को यह बताना ज़रूरी है कि यह व्रत किसी माँग के लिए नहीं, धन्यवाद के लिए है। सूर्य और छठी मैया को जो मिला उसके लिए धन्यवाद, यही इसका भाव है।
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