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वर्ष 2004 to 2005

दिल्ली में बसे कुछ मिथिला के परिवारों ने मिलकर तय किया कि पूजा और सहायता का काम एक पंजीकृत संस्था के रूप में किया जाए। मिथिला एकता विकास परिषद् इसी निर्णय से बनी।

पहले वर्ष का काम पर्वों के आयोजन और सदस्यों को जोड़ने तक सीमित रहा। इस वर्ष के कागज़ और चित्र अभिलेख में अभी दर्ज नहीं हुए हैं।